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Kamar Dard ka Totka in Hindi - कमर दर्द का टोटका

Kamar Dard ka Totka in Hindi

बढ़ती उमर में, बैठे बैठे काम करने से और बढ़ने से कमर दर्द होना एक आम शिकायत है. भारी वजन उठाने से भी यह दर्द प्रगट हो सकता है. कभी कभी स्लिप डिस्क के कारण भी कमर में दर्द होता है जो अत्यंत पीड़ा देता है क्योंकि रीड की हड्डी के नासो पर दबाव होने लगता है. ऐसे हालत में पैर में भी दर्द शुरू हो जाता है. यह कमर का दर्द (बॅकएक)&नबस्प;को अगर समयसर इलाज ना करे तो आयेज जाके पुर लोवर बॉडी में पाईं होने लगता है. इन सभी के लिए आप ट्रीटमेंट ले सकते है या तो यहाँ पर बताए गये देसी इलाज फॉर बॅक पाईं ओर कमर दर्द (कमर का दर्द और इलाज) का उपयोग करे.

Kamar Dard ka Totka

Kamar Dard ka Totka in Hindi - कमर दर्द का टोटका

  1. अपनी जीवेंशैली सुधारें
  2. योगा से पाया जा सकता है कमेर्दार्द पे काबू.
  3. रोज़ एक्सर्साइज़ ज़रूर करें.
  4. गरम पानी से सेके
  5. कमर दर्द में मालिश रामबाण इलाज है
  6. नमेक की सिकाए करे
  7. हार्ड बिस्तेर पेर सोए
  8. अपने खाने में टमाटर, खीरा, ककड़ी, पालक का उपयोग करे.
  9. गरम चीज़ो का उपयोग करें.
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Gale ke Cancer ka Ijal in Hindi - गले का कैंसर, लक्षण, कारण, निदान और इलाज


गले का कैंसर अधिकतर दो प्रकार का होता है:


1- स्वर यंत्र एवं
2- लारिंग्स का कैंसर

गले के कैंसर के लक्षण


गले के स्वर यंत्र के कैंसर
में आवाज भारी हो जाती है। गले की लसिका ग्रंथियों में सूजन भी आ जाती है। इसके अतिरिक्त सांस लेने एवं निगलने में तकलीफ होती है, खांसी के साथ रक्त मिश्रित बलगम आ जाता है।

गले एवं कान में तीव्र दर्द होता है। गले की ग्रास नलिका अथवा ग्रसनी के कैंसर में निगलने की तकलीफ होती है साथ ही स्वर यंत्र पर दबाव के कारण आवाज में बदलाव आ जाता है। रोगी को सांस लेने में भी परेशानी हो सकती है, गले में दर्द भी हो सकता है।

गले का कैंसर, लक्षण, कारण, निदान और इलाज
गले का कैंसर, लक्षण, कारण, निदान और इलाज

गले के कैंसर के कारण


अत्यधिक तंबाकू का सेवन और धूम्रपान करना तथा अधिक शराब पीना गले में कैंसर पैदा पर सकते हैं। कई रासायनिक पदार्थ जैसे कोलतार, एस्बेस्टस, विनाइल क्लोराइड, बेंजीन, कैडमियम, आर्सेनिक जैसे पदार्थ भी कैंसर उत्पन्न करने में सक्षम होते हैं। कई कारखानों में इन पदार्थों के संपर्क में प्रतिदिन आने से कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है। इसी तरह से खाद्य पदार्थ, जो गले में जलन पैदा करते हैं या तीक्ष्ण लगते हैं, कैंसर पैदा कर सकते हैं। अधिक मात्रा में प्रदूषण भी गले एवं कई प्रकार के अन्य कैंसर पैदा करते हैं। डिब्बा बंद खाद्य और कृत्रिम रंग तथा रसायनों के सेवन में भी कैंसर होने की संभावना हो जाती है। शीतल पेय, पेप्सी, कोक आदि का अधिक सेवन भी गले का कैंसर पैदा कर सकता है।

आनुवांशिक लक्षण भी कैंसर होने में सहायक हो सकते हैं यह देखा गया है कि यदि मां को किसी प्रकार का कैंसर है, तो बेटी को भी हो जाता है। पिता को कैंसर है, तो बेटे को भी होने की संभावना बढ़ जाती है

रोग निदान और इलाज


आधुनिक युग में रोग की पहचान शुरुआती लक्षणों में संभव है। यदि ऊपर लिखे लक्षणों में कोई मिले, तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें, जांच करवाएं। कैंसर की पहचान जितनी जल्दी होगी, चिकित्सा से उतना ही अधिक लाभ होगा। थोड़ी-सी शंका होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। कैंसर का शीघ्र निदान और इलाज ठीक से होने पर रोगी लंबी आयु जीता है। कैंसर के शीघ्र निदान के बाद शल्य-क्रिया कर दी जाए, तो रोगी सामान्य आयु तक जिंदा रहता है। शल्य क्रिया के अतिरिक्त विकिरण (रेडिएशन) द्वारा भी इलाज करते हैं जिससे रोगी को बहुत फायदा होता है। विशेष स्थितियों में कैंसर रोगी को दवाईयां भी दी जाती हैं।

गले का कैंसर, लक्षण, कारण, निदान और इलाज


गले के कैंसर से बचाव


गले के कैंसर से बचने के लिए आवश्यक है खान-पान की आदतों में सुधार लाना। हानिकारक नशे का सेवन छोड़कर इस रोग से बचा जा सकता है। कैंसर पैदा करने वाले सभी पदार्थों का सेवन छोड़ना अच्छा होता है। किसी भी रूप में तंबाकू का सेवन छोड़ देना चाहिए। इसके अतिरिक्त पान-मसाला, कच्ची सुपारी आदि का उपयोग भी बंद कर देना चाहिए। तंबाकू युक्त मंजन भी न करें। कैंसर से बचने के लिए शराब का सेवन भी छोड़ना उचित होगा। इसके अतिरिक्त ज्यादा तले, भुने, मिर्च-मसाले युक्त आहार प्रतिदिन नहीं खाना चाहिए। अधिक चर्बीयुक्त खाद्य पदार्थों से भी परहेज करें। इसके अतिरिक्त मोटापे पर नियंत्रण भी कैंसर से बचाव के लिए लाभकारी है क्योंकि यह पाया गया है कि मोटे लोगों को कैंसर होने की संभावना अधिक होती है।

भोजन में विटामिन ‘सी’ और ‘बी’ से भरपूर पदार्थों जैसे- गाजर, आंवला, अमरूद, नींबू, हरी सब्जियां सलाद इत्यादि को पर्याप्त मात्रा में शामिल कर इस रोग से बचा जा सकता है। प्रयोगों द्वारा यह सिद्ध हो चुका है कि विटामिन ‘सी’ और ‘बी’ तथा भोजन में रेशों की मात्रा शरीर को कई तरह के कैंसर से बचाती है। रेशायुक्त खाद्य लेने से आंतों के कैंसर से सुरक्षा मिलती है।

उम्र के 40 वर्ष के पश्चात् या दो वर्षों के अंतराल में कैंसर के लिए शरीर की जांच करवाना भी कैंसर की रोक-थाम में सहायक होता है। केवल गले के कैंसर से ही नहीं, अपितु कई तरह के अन्य कैंसरों से भी इन उपायों द्वारा बचा जा सकता है।
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मोटापा कम करने के उपाय

वजन बढ़ने के साथ ही कई प्रकार की स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍यायें शुरू हो जाती हैं। मोटापा कम करने के लिए सबसे ज्‍यादा जरूरी है अपनी जीवनशैली में खास बदलाव की। स्वस्थ खानपान और नियमित व्यायाम के जरिए आप बढ़ते वजन पर काबू पा सकते हैं।  

मोटापा बढने से डायबी‍टीज, ब्लडप्रेशर, हार्ट अटैक, ब्रेन स्टोन, कैंसर, अनिद्रा, जोडों और घुटनों की बीमारियां शुरू हो जाती हैं। मोटापा कम करने के लिए हमे अपने डाइट प्लान को ध्यान में रखना चाहिए। टाइम पर खाना चाहिए, डाइट संतुलित मात्रा में लेनी चाहिए। डाइट में प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइडेट की प्रचुर मात्रा होनी चाहिए।

हर इंसान को प्रतिदिन 2500 प्रति कैलोरी डाइट हर रोज लेनी चाहिए। तभी हमारा शरीर स्वस्‍थ्‍य और छरहरा रहेगा। जंक और फास्ट फूड खाने से बचें। खाने में हरी और पत्तेदार सब्जियों का ज्यादा प्रयोग करें। खाने में सलाद का प्रयोग ज्यादा मात्रा में करना शुरू कर दें। ज्यादा से ज्यादा पानी पियें।


Motapa Ka ilaj in hindi

मोटापा कम करने के उपाय

  • हर रोज सुबह-सुबह एक गिलास ठंडे पानी में दो चम्मच शहद घोलकर मिला लीजिए। इस घोल को पीने से शरीर से वसा की मात्रा कम होती है।
  • खाने में गेहूं के आटे की चपाती बंद करके जौ और चने के आटे की चपाती लेना शुरू करें। जौ और चने में कार्बोहाइड्रेट पदार्थ होते हैं जो आसानी से पच जाते हैं।
  • नीबूं का रस गुनगुने पानी में निचोड़कर पीयें, इससे भोजन अच्छे से पचता है और शरीर भी हल्का लगता है। शर्दियों में नींबू वाली चाय पिएं तो इससे पेट में गैस नहीं बनती।
  • मौसमी हरी सब्जियों का प्रयोग ज्‍यादा मात्रा में करें। मौसमी सब्जियां जैसे - मेथी, पालक, बथुआ, चौलाईसाग हैं। इनमें कैल्शियम अधिक मात्रा में होता है।
  • कम उर्जा वाले वयंजनों का सेवन करें। जैसे भूने चने, मूंग दाल, दलिया आदि का सेवन  करें। इनमें फैट कम होता है।
  • सुबह नाश्ते में अंकुरित अनाज लीजिए। मूंग, चना और सोयाबीन को अंकुरित करके खाने से से उनमें मौजूद पोषक तत्‍वों की मात्रा दोगुनी हो जाती है।
  • यदि आप मांसाहारी हैं तो तला हुआ मांस खाएं जिसमें तेल और घी जैसे चिकनाईयुक्‍त पदार्थ कम मात्रा में हो। रेड मीट बिलकुल न खायें।
  • अधिक चिकनाईयुक्त दूध, बटर तथा इससे बने पनीर का सेवन बंद कर दें। क्‍योंकि इनमें वसा ज्‍यादा मात्रा में होता है जो कि मोटापे का कारण बन सकता है।
  • फास्ट फूड, जंक फूड, कचौरी, समोसे, पिज्जा बर्गर न खाएं। कोल्ड ड्रिंक न पिएं, क्योंकि कोल्डा ड्रिंक की 500 मिलीलीटर मात्रा में 20 चम्मच शुगर होती है जिससे मोटापा बढ़ता है।
  • सोयाबीन का सेवन कीजिए। इसमें ज्‍यादा मात्रा में प्रोटीन होता है और इसमें पाया जाने वाला आइसोफ्लेवंस नामक प्रोटीन शरीर से चर्बी को कम करता है।
  • दही का सेवन करने से शरीर की फालतू चर्बी घटती है। मटठे का भी सेवन दिन में दो-तीन बार करें।
  • दो बडे चम्मच मूली के रस शहद में मिलाकर बराबर मात्रा में पानी के साथ पिएं, ऐसा करने से माह के बाद मोटापा कम होने लगेगा।
  • व्‍यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल कीजिए। व्‍यायाम जैसे - साइकलिंग, जॉगिंग, सीढी़ चढ़ना-उतरना, रस्सी कूदना, टहलना, घूमना इस प्रकार के व्यायाम नियमित रूप से करने से वजन घटाया जा सकता है।
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नाभिचक्र का अपने स्थान से हटना


परिचय-
 
मनुष्य के शरीर के विकास, नियंत्रण तथा संचालन में नाभि महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। माता के पेट में गर्भाधारण के समय से लेकर मृत्यु तक नाभि केन्द्र सतर्क, सक्रिय तथा सजग रहता है। माता के गर्भ के समय में नवजात शिशु का नाभि केन्द्र ही विकसित होता है। नवजात शिशु में नाभि केन्द्र ही प्राणों का संचय करता है। इसी के कारण ही उसके शरीर का विकास होता है।

नाभिचक्र का अपने स्थान से हटना nabhi ka digna


यदि नाभि शरीर में ठीक जगह न हो तो या फिर वह अपने स्थान से हट जाए, तो उसे `धरण पड़ गई` कहते हैं। इसके कारण शरीर में और भी कई रोग हो जाते हैं जैसे- यदि नाभि ऊपर की ओर चली गई तो गैस, खट्टी डकारें ,कब्ज तथा कई प्रकार के रोग हो सकते हैं। यदि नाभि नीचे की ओर चली गई हो या फिर नीचे की ओर खिसक गई तो रोगी को दस्त लगना, जी-मिचलाना जैसे रोग हो जाते हैं।

नाभिचक्र का अपने स्थान से हटने के कारण-

व्यक्ति के चलने-फिरने में असावधानी, अत्यधिक कूदने-फांदने, अधिक वजन उठाने वाले कार्य करने या किसी प्रकार से ऊंची-नीची जमीन पर अचानक पैर पड़ जाने से झटका लगता है तो यह रोग उस व्यक्ति को हो जाता है। अधिक बोझ उठाने तथा गलत तरीके के खान-पान के कारण भी यह रोग हो सकता है।

नाभिचक्र आपने स्थान पर है या नहीं यह पता लगाने के लिए कुछ दिशा निर्देश-
  • नाभिचक्र अपने स्थान पर है या नहीं यह पता लगाने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को सुबह के समय में शौच क्रिया के बाद पीठ के बल सीधा लेट जाना चाहिए।
  • रोगी व्यक्ति को अपने हाथ बगल में शरीर के साथ सीधे रखने चाहिए तथा दूसरे व्यक्ति को कहना चाहिए कि एक धागा लेकर नाभि से छाती की एक तरफ की निप्पल तक नापे।
  • इसके बाद रोगी को यह क्रिया दूसरे निप्पल के साथ भी करनी चाहिए और पता करना चाहिए कि दोनों तरफ के निप्पल के साथ धागे की समान दूरी है या नहीं।
  • यदि निप्पल के दोनों ओर की दूरी समान नहीं है तो समझा लेना चाहिए कि नाभिचक्र अपने स्थान से हट गई है और यदि दूरी समान है तो समझना चाहिए कि नाभिचक्र अपने स्थान पर है।
  • नाभिचक्र का अपने स्थान से हट जाने का पता लगाने का एक तरीका यह भी है कि सुबह के समय में खाली पेट पीठ के बल अपने दोनों टांगों को सीधा करके लेट जाए।
  • यदि नाभिचक्र अपने स्थान से हटा हुआ होगा तो किसी एक पैर का अंगूठा दूसरे पैर के अंगूठे से कुछ ऊंचा उठा हुआ रहेगा अन्यथा नहीं।
नाभिचक्र का अपने स्थान पर हट जाने पर प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार-
  • अपने पैरों को नापने पर अंगूठा यदि ऊपर की ओर दिखे तो उसे ऊपर की ओर खींचें। इस प्रकार की क्रिया 5-6 बार करें। ऐसा करने से नाभिचक्र अपने स्थान पर आ जाता है।
  • नाभिचक्र को अपने स्थान पर करने के लिए सुबह के समय में रोगी व्यक्ति को बिना खाना खाए जमीन पर या तख्त पर सीधे लेट जाना चाहिए। इसके बाद अपनी टांगों को सामने की ओर फैला दें। फिर दायीं टांग के घुटने को ऊपर की ओर रखकर दाएं हाथ से दाएं घुटने पर थोड़ा सा दबाव देकर भूमि या तख्त पर लगाने की कोशिश करना चाहिए। लेकिन दबाव देते समय एक बात का ध्यान रखना चाहिए कि दबाव उतना ही दे जितना रोगी व्यक्ति सहन कर पाए। ठीक इसी प्रकार की क्रिया दूसरी टांग पर भी करनी चाहिए। इसके बाद 5 से 6 बार इस क्रिया को दोहराना भी चाहिए।
  • नाभिचक्र अपने स्थान से हट जाने पर नाभि के अन्दर 2-3 बूंद तेल डालें। इसके बाद नाभि के चारों ओर तेल लगाकर दाईं से बाईं तरफ कम से कम तीन बार मालिश करें। इसके बाद नाभि के चारों ओर कम से कम तीन बार बाईं से दाईं तरफ मालिश करें। इस प्रकार से उपचार करने से नाभिचक्र अपने स्थान पर आ जाता है।
  • नाभिचक्र अपने स्थान से हट जाने पर रोगी के दोनों पैरों के अंगूठों में धागा बांध दें।
  • नाभिचक्र के अपने स्थान पर हटने पर नाभिचक्र को ठीक करने के लिए अर्थात नाभि को अपने स्थान पर लाने के लिए कई प्रकार के आसन है जिनको करने पर नाभिचक्र अपने स्थान पर आ जाता है।
  • आसन कुछ इस प्रकार के हैं- धनुरासन, नौकासन, भुजंगासन, चक्रासन, शवासन तथा उत्तानपादासन
नाभिचक्र के अपने स्थान पर आ जाने के बाद निम्नलिखित सावधानी बरतनी चाहिए ताकि नाभिचक्र फिर से अपने स्थान से न हट जाए-
सावधानियां-
  • जब नाभिचक्र अपने स्थान पर आ जाए इसके बाद रोगी व्यक्ति को जब भी उठना हो उसे बाईं करवट लेकर धीरे से उठना चाहिए।
  • रोगी को कुछ दिनों तक कागासन में बैठकर थोड़ा-सा अंकुरित या हल्का भोजन करना चाहिए।
  • रोगी को पानी अधिक से अधिक पीना चाहिए।
  • रोगी व्यक्ति को अधिक से अधिक आराम करना चाहिए।
  • नाभिचक्र से पीड़ित रोगी को कभी भी भारी वजन नहीं उठाना चाहिए। इस प्रकार से रोगी व्यक्ति का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार करने से रोगी का नाभिचक्र अपने स्थान पर आ जाता है तथा नाभिचक्र के हटने के कारण जो रोग व्यक्ति को होते हैं वे भी ठीक हो जाते हैं।
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Jodo ke Dard ka Ilaj - गठिया का आयुर्वेदिक इलाज़

Gathiya Baav Ka Desi Illaj | गठिया का आयुर्वेदिक इलाज़ | Jodo Ke Dard Ka Chamatkari Illaj:

  मित्रो गठिया रोग का भयानक दर्द जो सर्दी में और ज्यादा हो जाता है इसका एक रामबाण इलाज़ है मेथी,सोंठ और हल्दी तीनो को बराबर मात्रा  में पीस कर चूर्ण बना ले और इसे सुबह खाली  पेट गरम पानी के साथ लेना है । इससे गठिया के दर्द में आराम मिलता है । इस चूर्ण को लगभग डेढ़ या दो महीना लेना चाहिए जिससे पूरा आराम मिले । 



एक पेड़ जिसे हारसिंगार का पेड़ कहते है  इसके फूलो में बहुत महक होती है मतलब अच्छी खुशबू होती है उसके फूलों की जो रात में गिरे हो सवेरे उठा कर  उन्हें धो कर चटनी बना ले और एक गिलास पानी में उसे उबाले जब तक वह आधा न रह जाये फिर इसे ठंडा करके इसे पीने से हर तरह का गठिया का दर्द दूर हो जाता है
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महिलाओं के लिए यह है सेक्स का मतलब

पुरुषों की तरह ही महिलाओं के पास भी सेक्स करने के कई कारण होते हैं। लेकिन, महिलाओं के लिए बेहतर सेक्स संबंधों की परिभाषा पुरुषों की अपेक्षा कुछ अलग होती है। मनोवैज्ञानिक सिंडी मेस्टन और डेविड बुस ने अपनी पुस्तक why women have sex में इसका विस्तार से जिक्र किया गया है। मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक महिलाएं सिर्फ प्यार में ही सेक्स नहीं करतीं, बल्कि इसके पीछे 237 अलग-अलग वजहें होती हैं। अगर आप यह मानते हैं कि महिलाएं सेक्स के मामले में ज्यादा खुलापन नहीं रखतीं तो आप गलत हो सकते हैं।



करीब एक हजार महिलाओं पर किए गए शोध के मुताबिक महिलाएं सेक्स सिर्फ प्यार के लिए नहीं, बल्कि पुरुष का बेहतर साथ पाने के लिए, आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए, घर में अपना हक जमाने के लिए और सिर दर्द जैसी समस्या से निदान के लिए भी सेक्स करना पसंद करती हैं।


यही नहीं मनोवैज्ञानिकों ने अपनी किताब में कहा है कि महिलाएं कई बार अच्छे खासे फिट और चार्मिंग पुरुषों को छोड़कर सिर से गंजे और तोंद वाले लोगों को भी अपना हमसफर चुन लेती हैं। इसकी वजह उनकी कमाई, घर को सहारा देने की क्षमता और विश्वास होता है। शोध के मुताबिक महिलाएं अपने साथी का चुनाव डार्विन की थ्योरी 'सर्वाइवल इज दि फिटेस्ट' के आधार पर करती हैं। यह चौंकाने वाला हो सकता है, लेकिन अध्ययन के मुताबिक महिलाओं के पैमाने भी अलग-अलग होते हैं, जो काफी लाभदायक भी है।

मनोवैज्ञानिकों ने महिलाओं की विविधतापूर्ण सोच का हवाला देते हुए लिखा है कि यदि सभी महिलाएं लंबे कद के पुरुषों को ही पसंद करने लगेंगी तो फिर छोटे कद वाले लोगों के लिए तो जगह ही नहीं बचेगी। महिलाओं के लिए प्यार की बात की जाए तो वह सुरक्षा के साथ ही बच्चों को प्यार देने वाले और आत्मविश्वासी लोगों को पसंद करती हैं। महिलाएं प्यार का इस्तेमाल प्यार जताने, प्यार पाने औप उसे बनाए रखने के लिए भी करती हैं।  
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​पैसा न तोड़ दे रिश्तों की डोर

हर मीडिल क्लास फैमिली में एक वक्त आता है जब वित्तीय मामलों पर पति-पत्नी के बीच मतभेद होते हैं। इसकी वजह कम बचत और खर्चों का अनलिमिटेड होना है। फाइनेंस को लेकर दिक्कतें न आएं, इसके लिए जरूरी है कि हर कपल मनी मैनेजमेंट का सहारा ले। हम आपको बता रहे हैं शादी में मनी मैनेजमेंट के टिप्स:

सब कुछ क्लीयर रखें
एक महिला अपनी फैमिली के विस्तार के लिए जॉब से ब्रेक ले सकती है या फिर एक पुरूष अपने फाइनेंशियली डिपेंडेंट पैरेंट्स की मदद कर सकता है। मगर जो भी भविष्य में आपकी जिम्मेदारियां हैं, उन्हें अपने पार्टनर से जरूर शेयर करें। रिलेशनशिप काऊंसलर, सीमा हिंगोरन कहती हैं, 'अपने प्लान्स को पार्टनर से डिस्कस करना जरूरी है। इससे न सिर्फ उन्हें आपकी इच्छा पता होती है, साथ ही वह इसके लिए मानसिक तौर पर तैयार रहते हैं और खुद भी आपकी सहायता के लिए तैयार रहते हैं।'



इनकम एक्सपेंडिचर चार्ट करें तैयार


अब चूंकि आपको अपनी मासिक इनकम और खर्चे पता हैं, तो फिर इसके लिए बजट बनाकर इन्हें जॉइन्टली प्लान करें। इसमें आप अपने हाउस रेंट और अन्य खर्चे भी शामिल करें। इसके लिए आप अपनी इनकम लिखें और खर्चों की लिस्ट बनाएं ताकि आपके पार्टनर को आपके खर्चे, इनकम और सेविंग का अंदाजा रहे और उसी के अनुसार वह अपनी लाइफ प्लान करे।

बिल के लिए भी जॉइन्ट सेविंग अकाऊंट
यूं तो कपल्स में जॉइन्ट अकाउंट का चयन काफी पुराना है, मगर सेविंग के लिए ही नहीं, बल्कि अपने खर्चों के लिए भी जॉइन्ट अकाउंट बनाएं। ध्यान रखें कि इसमें खर्चों के पैसे शामिल हों। अपनी सैलरी के अनुसार ही इस अकाउंट में एक फिक्स्ड अमाउंट डालें। इस तरह आप दोनों में से जिसकी इनकम कम है, उस पर खर्चों का ज्यादा भार भी नहीं पड़ेगा।

इमरजेंसी फंड की व्यवस्था इमरजेंसी कभी भी किसी भी समय आ सकती है। ऐसी स्थिति में इमरजेंसी के लिए सेविंग करना बहुत जरूरी है। मगर यह सेविंग यूं ही न करें, बल्कि इसके लिए अलग से फंड बनाएं जिसमें हर माह कुछ निश्चित राशि जमा करें। बिना इमरजेंसी के इसमें से पैस न निकालें।

ट्रांसपैरेंसी का रखें ध्यान

इन खर्चों को लेकर आप दोनों के मन में किसी तरह की कोई गलतफहमी न पैदा हो, इसके लिए ट्रांसपैरेंसी भी बहुत जरूरी है। अगर आप घर खर्च से अलग भी कहीं खर्च करते हैं, तो बेहतर है कि इसके बारे में अपने पार्टनर को जरूर सूचित कर दें। अपने पैसों में से भी अगर आपने कोई पर्सनल खर्च भी किया है, तो वह भी खुलकर बताएं। अपने खर्चों को लेकर सीक्रेट रखना पार्टनर के माइंड में गलतफहमी पैदा कर सकता है।

समझौते और डिस्कशन करें

वित्तीय मामलों को समझदार और मैच्योर बनकर डिस्कस करें। ध्यान रखें कि दोनों पार्टनर को कुछ समझौते करने पड़ सकते हैं।

घर में बजट और खर्चों को लेकर अक्सर पति-पत्नी के बीच बह होती है। कई बार यह कारण पति-पत्नी के बीच शक और दूरियों का कारण भी बन जाता है।  
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Kamar Dard ka ilaj in Hindi - कमर दर्द में उपयोगी घरेलू उपचार

Kamar Dard ka ilaj in Hindi

लगभग ८०% लोग अपने जीवन में कभी न कभी कमर दर्द से  परेशान होते हैं। कमर दर्द नया भी हो सकता है और पुराना रोग भी हो सकता है। नया रोग कमर की मांसपेशियों का  असंतुलित उपयोग करने  से उत्पन्न होता है। रोग पुराना होने पर वक्त बेवक्त कमर दर्द होता रहता है और उसके कारण का पता नहीं चलता है। यह  दर्द कभी-कभी इतना भयंकर होता है कि रोगी तडफ़ उठता है,बैठना-उठना  और यहां तक कि बिस्तर में करवट बदलना भी कठिन हो जाता है। सतही तौर पर देखने पर कमर में होने वाला दर्द भले ही एक सामान्य सी मेडिकल स्थिति लगता है, लेकिन इसे नज़रअंदाज करने से समस्या काफी बढ़ सकती है।

Kamar Dard ka ilaj in Hindi
Kamar Dard ka ilaj

शरीर के अंगों  जैसे गुर्दे   में  इन्फ़ेक्शन,पोरुष ग्रंथि की व्याधि,स्त्रियों में पेडू के विकार ,मूत्राषय के रोग  और कब्ज  की वजह से कमर दर्द हो सकता है। गर्भवती स्त्रियों में कमर दर्द आम तौर पर पाया जाता है। गर्भ में बच्चे के बढने से भीतरी अंगों  पर दवाब बढने से कमर दर्द हो सकता है।

Kamar Dard ka ilaj in Hindi - कमर दर्द में उपयोगी घरेलू उपचार

कमर दर्द में लाभकारी घरेलू   उपचार  किसी भी आनुषंगिक दुष्प्रभाव से मुक्त हैं और असरदार भी है। देखते हैं कौन से हैं वे उपचार जो कमर दर्द  राहत पहुंचाते हैं--

 १) नीचे रखी कोई वस्तु उठाते वक्त पहिले अपने घुटने मोडें फ़िर उस वस्तु को उठाएं।

२) भोजन में पर्याप्त लहसुन का उपयोग करें। लहसुन कमर दर्द  का  अच्छा उपचार माना गया है।

३) गूगल कमर दर्द में अति उपयोगी घरेलू चिकित्सा  है। आधा चम्मच गूगल गरम पानी  के साथ सुबह-शाम सेवन करें।

४) चाय  बनाने में ५ कालीमिर्च के दाने,५ लौंग  पीसकर  और थौडा सा सूखे अदरक  का पावडर  डालें।  दिन मे दो बार पीते रहने से कमर दर्द में लाभ होता है।

५)  सख्त बिछोने पर सोयें। औंधे मुंह पेट के बल सोना हानिकारक है।

६)  २ ग्राम दालचीनी का पावडर एक चम्मच  शहद में मिलाकर दिन में दो बार लेते रहने से कमरदर्द में शांति मिलती है।

७) कमर दर्द पुराना हो तो शरीर को गर्म रखें और गरम वस्तुएं खाऎं।

८)  दर्द वाली जगह पर बर्फ़ का प्रयोग करना  हितकारी उपाय है। इससे भीतरी सूजन भी समाप्त होगी। कुछ रोज बर्फ़ का उपयोग करने के बाद गरम सिकाई प्रारंभ कर देने के अनुकूल परिणाम  आते हैं।

९)  भोजन मे टमाटर,गोभी,चुकंदर,खीरा ककडी,पालक,गाजर,फ़लों का प्रचुर उपयोग करें।

१०)  नमक मिलें गरम पानी में एक तौलिया डालकर निचोड़ लें। पेट के बल लेटकर दर्द के स्थान पर तौलिये द्वारा भाप लेने से कमर दर्द में राहत मिलती है।

११)रोज सुबह सरसों या नारियल के तेल में लहसुन की तीन—चार कलियॉ डालकर (जब तक लहसुन की कलियाँ काली न हो जायें) गर्म कर लें फिर ठंडा कर इसकी पीठ—कमर में मालिश करें।

१२)  कढ़ाई में दो—तीन चम्मच नमक डालकर इसे अच्छे से सेक लें। थोड़े मोटे सूती कपड़े में यह गरम नमक डालकर पोटली बांध लें। कमर पर इसके द्वारा सेक करें।
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कब्ज (कांस्टीपेशन) से मुक्ति पाने के सरल उपचार


Qabz Ka Gharelu Desi Ilaj in Hindi

कब्ज मिटाने के सरल उपचार

Qabz Ka Gharelu Desi Ilaj in Hindi
Qabz Ka Gharelu Desi Ilaj in Hindi
अनियमित खान-पान के चलते लोगों में कब्ज  एक आम बीमारी की तरह प्रचलित है। यह पाचन तन्त्र का प्रमुख विकार है।  कब्ज सिर्फ भूख ही कम नहीं करती  बल्कि  गेस ,एसिडिटी  व् शरीर में होने वाली अन्य कई समस्याएं पैदा कर  सकती है|  बच्चों से लेकर वृद्ध तक इस रोग से पीड़ित रहते हैं|

    मनुष्यों मे मल निष्कासन की फ़्रिक्वेन्सी अलग-अलग पाई जाती है। किसी को दिन में एक बार मल विसर्जन होता है तो किसी को दिन में २-३ बार होता है। कुछ लोग हफ़्ते में २ य ३ बार मल विसर्जन करते हैं। ज्यादा कठोर,गाढा और सूखा मल जिसको बाहर धकेलने के लिये जोर लगाना पडे यह कब्ज रोग का प्रमुख लक्षण  है।ऐसा मल हफ़्ते में ३ से कम दफ़ा आता है और यह इस रोग का दूसरा लक्षण  है। कब्ज रोगियों में पेट फ़ूलने की शिकायत भी साथ में देखने को मिलती है। यह रोग किसी व्यक्ति को किसी भी आयु में हो सकता है हो सकता है लेकिन महिलाओं और बुजुर्गों में कब्ज रोग की प्राधानता पाई जाती है।

       मैं नीचे कुछ ऐसे कब्ज निवारक उपचारों का उल्लेख कर रहा हूं जिनके समुचित  उपयोग से कब्ज का निवारण होता है और कब्ज से होने वाले रोगों से भी बचाव हो जाता है--

१)  कब्ज का मूल कारण शरीर मे तरल की कमी होना है। पानी की कमी से आंतों में मल सूख जाता है और मल निष्कासन में जोर लगाना पडता है। अत: कब्ज से परेशान रोगी को दिन मे २४ घंटे मे मौसम के मुताबिक ३ से ५ लिटर पानी पीने की आदत डालना चाहिये। इससे कब्ज रोग निवारण मे बहुत मदद मिलती है।

२)  भोजन में रेशे की मात्रा ज्यादा रखने से कब्ज निवारण होता है।हरी पत्तेदार सब्जियों और फ़लों में प्रचुर रेशा पाया जाता है। मेरा सुझाव है कि अपने भोजन मे करीब ७०० ग्राम हरी शाक या फ़ल या दोनो चीजे शामिल करें।

३)  सूखा भोजन ना लें। अपने भोजन में तेल और घी की मात्रा का उचित स्तर बनाये रखें। चिकनाई वाले पदार्थ से दस्त साफ़ आती है।

४)  पका हुआ बिल्व फ़ल कब्ज के लिये श्रेष्ठ औषधि है। इसे पानी में उबालें। फ़िर मसलकर रस निकालकर नित्य ७ दिन तक पियें। कज मिटेगी।

५)  रात को सोते समय एक गिलास गरम दूध पियें। मल आंतों में चिपक रहा हो तो दूध में ३ -४ चम्मच केस्टर आईल (अरंडी तेल) मिलाकर पीना चाहिये। हमेशा कब्ज से पीड़ित लोगों के लिए बादाम का तेल बेहतर विकल्प है| इससे आंत की कार्य  क्षमता  बढ़ती है | रात को सोते वक्त  गुन गुने दूध में बादाम  का तेल ३ ग्राम मिलाकर  सेवन करें|| तेल की मात्रा  धीरे - धीरे  बढ़ाक्र ६ ग्राम तक ले जाएँ| | ३०-४० दिन तक  यह प्रयोग करने से वर्षों से  चली आ रही  कब्ज भी  जड से खत्म हो जाती है|

६)  इसबगोल की की भूसी कब्ज में परम हितकारी है। दूध या पानी के साथ २-३ चम्मच इसबगोल की भूसी रात को सोते वक्त लेना फ़ायदे मंद है। दस्त खुलासा होने लगता है।यह एक कुदरती रेशा है और आंतों की सक्रियता बढाता है।

७)  नींबू कब्ज में गुण्कारी है। मामुली गरम जल में एक नींबू निचोडकर दिन में २-३बार पियें। जरूर लाभ होगा।

नीम्‍बू का रस गर्म पानी के साथ रात्रि‍ में लेने से दस्‍त खुलकर आता हैं। नीम्‍बू का रस और शक्‍कर प्रत्‍येक 12 ग्राम एक गि‍लास पानी में मि‍लाकर रात को पीने से कुछ ही दि‍नों में पुरानी से पुरानी कब्‍ज दूर हो जाती है।

८)  एक गिलास दूध में १-२ चाम्मच घी मिलाकर रात को सोते समय पीने से भी कब्ज रोग का समाधान होता है।

९)  एक कप गरम जल मे १ चम्म्च शहद मिलाकर पीने से कब्ज मिटती है। यह मिश्रण दिन मे ३ बार पीना हितकर है।

१०)  जल्दी सुबह उठकर एक लिटर  मामूली गरम पानी पीकर २-३ किलोमीटर घूमने जाएं। कब्ज का बेहतरीन उपचार है।

११)  दो सेवफ़ल प्रतिदिन खाने से कब्ज में लाभ होता है।

१२)  अमरूद और पपीता ये दोनो फ़ल कब्ज रोगी के लिये अमॄत समान है। ये फ़ल दिन मे किसी भी समय खाये जा सकते हैं। इन फ़लों में पर्याप्त रेशा होता है और आंतों को शक्ति देते हैं। मल आसानी से विसर्जीत होता है।

१३)  अंगूर मे कब्ज निवारण के गुण हैं । सूखे अंगूर याने किश्मिश पानी में ३ घन्टे गलाकर खाने से आंतों को ताकत मिलती है और दस्त आसानी से आती है। जब तक बाजार मे अंगूर मिलें नियमित रूप से उपयोग करते रहें।

१४)  अलसी के बीज का मिक्सर में पावडर बनालें। एक गिलास पानी मे २० ग्राम के करीब यह पावडर डालें और ३-४ घन्टे तक गलने के बाद छानकर यह पानी पी जाएं। बेहद उपकारी ईलाज है। अलसी में प्रचुर ओमेगा फ़ेटी एसिड्स होते हैं जो कब्ज निवारण में महती भूमिका निभाते हैं।

१५)  पालक का रस या पालक कच्चा खाने से कब्ज नाश होता है। एक गिलास पालक का रस रोज पीना उत्तम है। पुरानी से पुरानी कब्ज भी इस सरल उपचार से मिट जाती है।

१६)   अंजीर कब्ज हरण फ़ल है। ३-४ अंजीर फ़ल रात भर पानी में गलावें। सुबह खाएं। आंतों को गतिमान कर कब्ज का निवारण होता है।

१७) बड़ी  मुनक्का  पेट के लिए बहुत लाभप्रद होती है|  मुनका में कब्ज नष्ट करने के तत्व हैं। ७ नग मुनक्का रोजाना रात को सोते वक्त लेने से कब्ज रोग का स्थाई समाधान हो जाता है। एक तरीका ये है कि  मुनक्का को दूध में उबालें  कि दूध आधा रह जाए | गुन गुना दूध  सोने के आधे घंटे पाहिले सेवन करें | मुनक्का में पर्याप्त लोह तत्व होता है और दूध में आयरन  नहीं होता है  इसलिए दूध में   मुनक्का डालकर पीया जाय तो आयरन की भी  पूर्ती हो  जाती  है|
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अब आप खुद बन जाइए अपने ड्रेस डिजाइनर

मार्केट से डिजाइनर ड्रेस खरीदने का समय अब आपका गया। अब आप खुद बन जाइये अपने ड्रेस डिजाइनर। दरअसल, इस समय ट्रेंड है सेल्फ स्टाइलिंग का। यानी अपना फैशन खुद तैयार करना। इसमें मिक्स एंड मैच का भी कोई कॉन्सेप्ट नहीं होता। बस आपको वही कैरी करना होता है, जो आप पर जंचे 

सबसे जुदा 


यह स्टाइल किसी से मैच नहीं होता, क्योंकि ये अपने खुद क्रिएट किया होता है। इसलिए आपका डिफरेंट दिखना तो तय है। पर्सनैलिटी अपीयरेंस के लिए आप इस स्टाइल को किसी भी मौके पर कैरी कर सकती हैं। 


नो मिक्स एंड मैच 


इसमें मिक्स एंड मैच जैसा कोई फंडा आपको नहीं अपनाना है। बस, कुछ डिफरेंट चीजें मिलाकर अपना एक ऐसा स्टाइल तैयार करना है, जो आप पर जंचे। इसमें जितना डिफरेंट होगा, उतना आप पर जंचेगा। हां, इस बात का ध्यान जरूर रखें कि ड्रेस के कलर्स आपकी पर्सनैलिटी से मैच करें। दरअसल, सेल्फ स्टाइल फैशन किसी रैम्प से नहीं उतरा है बल्कि इसे खुद युवाओं ने गढ़ा है, क्योंकि सेल्फ स्टाइलिंग में मैचिंग का कोई फंडा नहीं होता है। बस जो आपकी पर्सनैलिटी पर सूट करे वही फैशन है। आप जींस को फोल्ड करके उसे कैप्री का रूप दे सकती हैं और उसे स्टैप वाले टॉप और हाथ में फंकी कड़ों के साथ पहन सकती हैं। आप प्लेन बेस पर हल्के बॉर्डर वाली साड़ी के साथ डीप नेक वाला बलाउज पहनकर अपना फैशन स्टाइल बना सकती हैं। 

इनका भी जमेगा रंग 


पटियाले के साथ स्लीवलेस शार्ट टॉप भी पहन सकती हैं। आप स्लीवलेस टॉप के साथ स्टोल, सनग्लॉस वॉच और हाथों में दो रिंग पहनकर भी खुद को एक स्टाइल दे सकती हैं। एक्सेसरीज में डेंटल ज्वेलरी आजकल खूब चलन में है, इसे पहन कर स्टाइल स्टेटमेंट भी बन सकती हैं। 


वाइब्रेंट कलर्स 


वायब्रेंट कलर्स विंटर में खूबसूरत लगते हैं। टेंड के साथ चलना चाहती हैं, तो बोल्ड और ब्राइट शेड्स को अपने वॉर्डरोब में शामिल करें। विंटर में लेयरिंग स्मार्ट तो लगती ही है, ठंडी हवाओं से आपको प्रोटेक्ट भी करती है। लेयरिंग के लिए कलरफुल टी-शर्ट्स, जैकेट्स और लेगिंग्स को मिक्स मैच करके पहनें। ब्लैक लेगिंग्स के साथ 
टॉप ब्राइट कलर का होना चाहिए। 


फ्लोरल प्रिंट 


स्मार्ट लुक के लिए आपको लेयरिंग के लिए परफेक्ट मिक्स मैच करना होगा और कलर कॉम्बिनेशन का भी खासध्यान रखना होगा। वायबेंरट कलर्स के फ्लोरल प्रिंटवाले ड्रेसेज विंटर में खूबसूरत लगते हैं लेकिन ध्यान रखें किअगर फ्लोवर प्रिंट पहन रही हैं तो एक्सेसरीज कम से कम ही पहनें। 


हाइट कम हो तो 


अगर आपकी हाइट कम हो तो आप थोडा लम्बा दिखने के लिए शिफॉन सिल्क और जार्जेट जैसे फैब्रिक पर वीगले के शेप में डिजाइन दे कर कोई भी स्टाइल बना सकती हैं। इससे आप लम्बी और स्मार्ट लगेंगी। लोवेस्ट जींसके साथ आप स्टोन वर्क वाली डिजानर जैकेट भी पहन सकती हैं। जींस टॉप के साथ ऊपर से आप वेस्ट या स्कार्फस्ट्रैपी वाले टॉप भी पहन सकती हैं। 


आउटफिट के साथ मैच करें 


नया फैशन रूल यही कहना है कि शूज और बैग्स का कलर मैच करना काफी बोरिंग और आउटडेटेड फैशन है।इसलिए यह यादा जरूरी है कि आपका हैंडबैग आपके आउटफिट के साथ मैच करता हो। 


बोरिंग सोच से बाहर आएं 


अलग अलग मेटल्स एक साथ नहीं पहन सकती हैं। इस बोरिंग सोच से बाहर आइए और गोल्ड सिल्वर ,ब्रॉन्ज एक साथ पहनिए। इस बार फैशन में कट्स से लेकर कलर्स तक में काफी बदलाव आए हैं। पहले जहां आरेंजको अवॉइड किया जाता था वहीं अब सभी तरह के क्रिएशन्स में इसे इस्तेमाल किया जा सकता है। 


चोली 


कॉर्सेट व चोली को आप साड़ी लहंगा स्कर्ट के साथ पहन सकती हैं। कॉर्सेट को आप जीन्स के साथ भी पहनसकती हैं। चिकन का कुर्ता जिसे आप जींस चूड़ीदार सलवार के साथ पहन सकती हैं। 
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फैशन में चढ़ा ट्यूलिप का रंग

ट्यूलिप फ्लावर की शेप से प्रभावित ट्यूलिप पैटर्न ड्रेसेज इन दिनों गर्ल्स को काफी लुभा रही हैं। खास बात यह है कि इन ड्रेसेज से वेस्टर्न और इंडो-वेस्टर्न दोनों ही तरह के लुक क्रिएट किए जा सकते हैं। यही वजह है कि कैजुअल ओकेजन से लेकर बिजनस और इवनिंग वियर के तौर पर भी इन ड्रेसेज को काफी पसंद किया जा रहा है। ड्रेसेज के अलावा स्कर्ट और फ्रॉक में भी ट्यूलिप पैटर्न काफी हिट है। तभी तो मार्केट से लेकर शॉपिंग वेबसाइट्स पर इस पैटर्न की ड्रेसेज की डिफरेंट रेंज मौजूद हैं। 

इन ड्रेसेज के साथ डिफरेंट एक्सेसरीज मैच कर आप स्टाइलिश लुक दे सकती हैं। फंकी लुक के लिए फंकी एक्सेसरीज जैसे वुडन, प्लास्टिक, मैटल की बोल्ड जूलरी और हेडगियर यूज कर सकते हैं, जबकि एलिगेंट लुक के लिए सिंपल, सोबर जूलरी मैच करें। फॉर्मल लुक के लिए ज्यादा एक्सेसरीज की बजाय हेयर स्टाइल और ईयररिंग्स पर फोकस करें। 

फ्रॉक, स्कर्ट्स और ड्रेसेज के सिंपल कट्स से अगर आप बोर हो गई हैं, तो ट्यूलिप पैटर्न से अपनी स्टाइल में ट्विस्ट ला सकती हैं। इन दिनों वेस्टर्न आउटफिट्स में ट्यूलिप पैटर्न की ड्रेसेज काफी पसंद की जा रही हैं।
डिफरेंट स्टाइल और पैटर्न फैब्रिक के अलावा इन ड्रेसेज की लेंथ और स्टाइल में भी काफी वैरायटी है। बॉडी शेप के अनुसार स्कर्ट की शेप भी डिफरेंट होती है। इन्हें कैजुअल, फॉर्मल या बिजनस ओकेजन के लिए भी पहना जा सकता है। फैंसी टॉप और ट्रेंडी एक्सेसरीज से इन ड्रेसेज में थोड़ा स्टाइल भी एड किया जा सकता है। इसी तरह इन स्कर्ट्स की डिजाइन भी काफी अलग है। कहीं स्ट्रेट फिटिंग के साथ ट्यूलिप टच दिया गया है, तो कहीं हल्के घर के साथ यह पैटर्न एड किया है। इसी तरह ये शॉर्ट और लॉन्ग दोनों ही लेंथ में अवेलेबल हैं। 


कैजुअल ओकेजन के लिए 

ट्यूलिप स्कर्ट के साथ स्लीवलेस टॉप कंबाइन किया जा सकता है। टॉप को स्कर्ट के साथ टक किया जा सकता है या बाहर भी रख सकते हैं। सिंपल लुक के लिए पोलो नेक टॉप जबकि सॉफ्टर लुक के लिए लॉन्ग स्लीव का टॉप यूज कर सकते हैं। इनके साथ हाई हील सैंडल्स मैच कर सकते हैं। एक्सेसरीज में बेल्ट्स लगाना ना भूलें। 

फॉर्मल इवनिंग वियर के लिए भी ये परफेक्ट ड्रेस हैं। फैंसी लुक के लिए ट्यूलिप स्कर्ट को कॉर्सेट टॉप के साथ पहन सकते हैं। इसमें लेस, सिल्क, साटिन, सीक्वेंस, बीड्स या मैटेलिक फैब्रिक्स के टॉप हो सकते हैं। क्लच पर्स के अलावा डायमंड या पर्ल जूलरी यूज कर सकती हैं। 

प्लीट्स और घेर का फ्यूजन इस पैटर्न में प्लीट्स और घेर दोनों का फ्यूजन होता है, जिससे ये स्ट्रेट और फ्लोई दोनों ही लुक देते हैं। स्लिम फिगर पर यह काफी सूट करते हैं, जबकि हेल्थी गर्ल्स इसे लॉन्ग टॉप के साथ ट्राई कर सकती हैं। 
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… तो सेक्स होगा और मजेदार

महिलाओं का बिस्तर में जोश और उत्साह से भरा होना पुरुषों को बहुत अच्छा लगता है। इसलिए जहां तक सेक्स का सवाल है, इस मसले पर आपको थोड़ा खुल कर सामने आना होगा। हो सकता है शुरुआत में यह आपको थोड़ा बुरा लगे, लेकिन बाद में आप इसे इंजॉय करेंगी। हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसे सेक्स आइडियाज के बारे में, जिन्हें अपनाकर आप अपनी सेक्स लाइफ को बेहतरीन बना सकती हैं:

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 सेक्स होगा और मजेदार
थोड़ा हिट करो ना 
अपने पार्टनर से कहें कि वह आपको अपने घुटनों के पास ले जाकर आपके बॉटम पर थोड़ी थपकियां मारे। हो सकता है यह आपके पार्टनर को पसंद आए। और हां, इस दौरान आपकी आहें उसे और भी जोश दिला देंगी।

उनसे कहिए कि आपको बेड से बांध दें और जो मर्जी हो वो करें। यह आपके साथ-साथ आपके पार्टनर के लिए भी एक शानदार अनुभव होगा। इस तरह से आपको यह भी पता चलेगा कि आपके पार्टनर को बेड में आपके साथ क्या-क्या करना पसंद है।

साथ में देखें पॉर्न 
बहुत सारी महिलाओं को पॉर्न देखना अच्छा नहीं लगता, लेकिन आप अपने आपको उसके साथ पॉर्न देखने के लिए तैयार करिए। पॉर्न में दिखाए गए सारे मूव्स करना शायद आपके लिए पॉसिबल न हो, पर

सबकुछ शूट करें 
सेक्स के पलों को शूट करने से ज्यादा आपको कुछ भी रोमांचित नहीं कर सकता। लेकिन एक बात का हमेशा ख्याल रखें कि जिस व्यक्ति के साथ आप यह करने जा रही हैं वह भरोसे लायक है या नहीं। भविष्य में उन पलों की रिकॉर्डिंग देखकर आपकी मीठी यादें भी ताजा हो जाएंगी...;)

रोल प्ले 
रोल प्ले सेक्स में एक नई जान फूंक देता है। इसलिए अपने पार्टनर के साथ अपने प्यार के खेल में एक बार इसे भी लागू करें। यकीन मानिए, आपकी रातें पहले से कहीं ज्यादा हसीन लगने लगेंगी।

उसके पीछे-पीछे जाएं 
पुरुषों को भी पीछे से अपने गले और पीठ पर की गई किस काफी अच्छी लगती है। आप अपने पार्टनर के साथ एक बार यह ट्राइ करके देखिए, क्या पता इसका अंत एक शानदार सेक्स सेशन के रूप में हो...;)

आइना सब दिखाता है 
थोड़ा सा और सेक्सी, थोड़ी और सनसनाहट महसूस करने के लिए अपने बेड के बगल में एक बड़ा सा आइना लगाएं, और उन खास पलों के दौरान खुद को हरकत में देखें। यह आपके लिए एक जबर्दस्त अनुभव साबित हो सकता है।

आहिस्ता-आहिस्ता 
जब भी आपका पार्टनर आपके साथ जल्दी करने की कोशिश में लगें, उसको कंट्रोल करें और थोड़ा तड़पाएं। उसकी तड़प को उस हद तक ले जाएं जहां से आगे जाने के बाद वह नाराज हो सकता है। फिर उसके साथ उस हसीन सफर पर निकल पड़ें, जिसके लिए आपने यह तैयारी की थी।

उसका भी कहना मानें 
एक रात के लिए वह जो भी कहे उसे मान लें। उसकी हर बात मानने के बाद आप अपनी भी फीलिंग्स उसके साथ शेयर करें। ऐसा करने से आप दोनों की रिलेशनशिप मजबूत होगी।

जी-स्पॉट ढूंढ़ने को कहें 
उसके साथ सेक्स के हसीन सफर के दौरान उससे अपना जी-स्पॉट ढूंढ़ने को कहें। इसके लिए आप डिफरेंट पोजिशंस तब तक ट्राइ करती रहें, जब तक कि वह आपको फाइनली मिल न जाए।

पढ़ें कोई 'गंदी किताब'
जी हां, कुछ ऐसी किताबें लाइए जो आपके अंदर की सेक्स इच्छाओं को बाहर लाने में मदद करे। शाम को उनके आने से पहले वैसे ही कपड़े पहनी रहें, जैसे उस बुक के कैरक्टर्स ने पहने हुए थे। फिर देखिए आपकी यह पहल क्या रंग लाती है...:P

थोड़ा और नॉटी हो जाएं 
पुरुषों के टेस्टिकल्स और उनके एनल रीजन के बीच की जगह सबसे ज्यादा सेंसिटिव होती है। अगर कहावतों पर यकीन करें तो पुरुषों का जी-स्पॉट भी वहीं कहीं होता है। उस जगह को धीरे-धीरे, आहिस्ता-आहिस्ता छूएं। अगर आपको प्रॉब्लम न हो, तो ब्लोजॉब देते हुए आप ऐसा कर सकती है।

एक बार थोड़ी जल्दी मचाएं 
एक बार पूरे कपड़ों के साथ सेक्स करें, बस उन्ही को हटाएं जो सेक्स के दौरान बाधा उत्पन्न करें। ऐसा सेक्स आप कहीं भी कर सकती हैं, ऑफिस में, किचन में या फिर कार में। आप मानें या न मानें, पर अपने प्यार को दिखाने का भी यह एक जबर्दस्त तरीका है।

मैं तो खुद से प्यार जताऊं 
एक बार उसके सामने खुद ही अपने शरीर के नाजुक अंगों से खेलना शुरू करें। आपको ऐसा करते देख आपके पार्टनर को कुछ-कुछ जरूर होगा, और फिर वह आपको बेचैन करके रख देखा। यकीन नहीं आता! एक बार करके देखिए।

आओ मुझे खा लो 
अपनी बॉडी के हर उस पार्ट पर कोई न कोई ऐसी चीज रखें, जिन्हें वह खाना पसंद करता हो। उससे कहें कि बिना हाथ का इस्तेमाल किए हुए वह वे चीजें खाकर दिखाए। जब वह ऐसा करेगा, उस समय आप भी काफी इंजॉय कर रही होंगी..
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