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Kamar Dard ka Totka in Hindi - कमर दर्द का टोटका

Kamar Dard ka Totka in Hindi

बढ़ती उमर में, बैठे बैठे काम करने से और बढ़ने से कमर दर्द होना एक आम शिकायत है. भारी वजन उठाने से भी यह दर्द प्रगट हो सकता है. कभी कभी स्लिप डिस्क के कारण भी कमर में दर्द होता है जो अत्यंत पीड़ा देता है क्योंकि रीड की हड्डी के नासो पर दबाव होने लगता है. ऐसे हालत में पैर में भी दर्द शुरू हो जाता है. यह कमर का दर्द (बॅकएक)&नबस्प;को अगर समयसर इलाज ना करे तो आयेज जाके पुर लोवर बॉडी में पाईं होने लगता है. इन सभी के लिए आप ट्रीटमेंट ले सकते है या तो यहाँ पर बताए गये देसी इलाज फॉर बॅक पाईं ओर कमर दर्द (कमर का दर्द और इलाज) का उपयोग करे.

Kamar Dard ka Totka

Kamar Dard ka Totka in Hindi - कमर दर्द का टोटका

  1. अपनी जीवेंशैली सुधारें
  2. योगा से पाया जा सकता है कमेर्दार्द पे काबू.
  3. रोज़ एक्सर्साइज़ ज़रूर करें.
  4. गरम पानी से सेके
  5. कमर दर्द में मालिश रामबाण इलाज है
  6. नमेक की सिकाए करे
  7. हार्ड बिस्तेर पेर सोए
  8. अपने खाने में टमाटर, खीरा, ककड़ी, पालक का उपयोग करे.
  9. गरम चीज़ो का उपयोग करें.
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Gale ke Cancer ka Ijal in Hindi - गले का कैंसर, लक्षण, कारण, निदान और इलाज


गले का कैंसर अधिकतर दो प्रकार का होता है:


1- स्वर यंत्र एवं
2- लारिंग्स का कैंसर

गले के कैंसर के लक्षण


गले के स्वर यंत्र के कैंसर
में आवाज भारी हो जाती है। गले की लसिका ग्रंथियों में सूजन भी आ जाती है। इसके अतिरिक्त सांस लेने एवं निगलने में तकलीफ होती है, खांसी के साथ रक्त मिश्रित बलगम आ जाता है।

गले एवं कान में तीव्र दर्द होता है। गले की ग्रास नलिका अथवा ग्रसनी के कैंसर में निगलने की तकलीफ होती है साथ ही स्वर यंत्र पर दबाव के कारण आवाज में बदलाव आ जाता है। रोगी को सांस लेने में भी परेशानी हो सकती है, गले में दर्द भी हो सकता है।

गले का कैंसर, लक्षण, कारण, निदान और इलाज
गले का कैंसर, लक्षण, कारण, निदान और इलाज

गले के कैंसर के कारण


अत्यधिक तंबाकू का सेवन और धूम्रपान करना तथा अधिक शराब पीना गले में कैंसर पैदा पर सकते हैं। कई रासायनिक पदार्थ जैसे कोलतार, एस्बेस्टस, विनाइल क्लोराइड, बेंजीन, कैडमियम, आर्सेनिक जैसे पदार्थ भी कैंसर उत्पन्न करने में सक्षम होते हैं। कई कारखानों में इन पदार्थों के संपर्क में प्रतिदिन आने से कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है। इसी तरह से खाद्य पदार्थ, जो गले में जलन पैदा करते हैं या तीक्ष्ण लगते हैं, कैंसर पैदा कर सकते हैं। अधिक मात्रा में प्रदूषण भी गले एवं कई प्रकार के अन्य कैंसर पैदा करते हैं। डिब्बा बंद खाद्य और कृत्रिम रंग तथा रसायनों के सेवन में भी कैंसर होने की संभावना हो जाती है। शीतल पेय, पेप्सी, कोक आदि का अधिक सेवन भी गले का कैंसर पैदा कर सकता है।

आनुवांशिक लक्षण भी कैंसर होने में सहायक हो सकते हैं यह देखा गया है कि यदि मां को किसी प्रकार का कैंसर है, तो बेटी को भी हो जाता है। पिता को कैंसर है, तो बेटे को भी होने की संभावना बढ़ जाती है

रोग निदान और इलाज


आधुनिक युग में रोग की पहचान शुरुआती लक्षणों में संभव है। यदि ऊपर लिखे लक्षणों में कोई मिले, तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें, जांच करवाएं। कैंसर की पहचान जितनी जल्दी होगी, चिकित्सा से उतना ही अधिक लाभ होगा। थोड़ी-सी शंका होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। कैंसर का शीघ्र निदान और इलाज ठीक से होने पर रोगी लंबी आयु जीता है। कैंसर के शीघ्र निदान के बाद शल्य-क्रिया कर दी जाए, तो रोगी सामान्य आयु तक जिंदा रहता है। शल्य क्रिया के अतिरिक्त विकिरण (रेडिएशन) द्वारा भी इलाज करते हैं जिससे रोगी को बहुत फायदा होता है। विशेष स्थितियों में कैंसर रोगी को दवाईयां भी दी जाती हैं।

गले का कैंसर, लक्षण, कारण, निदान और इलाज


गले के कैंसर से बचाव


गले के कैंसर से बचने के लिए आवश्यक है खान-पान की आदतों में सुधार लाना। हानिकारक नशे का सेवन छोड़कर इस रोग से बचा जा सकता है। कैंसर पैदा करने वाले सभी पदार्थों का सेवन छोड़ना अच्छा होता है। किसी भी रूप में तंबाकू का सेवन छोड़ देना चाहिए। इसके अतिरिक्त पान-मसाला, कच्ची सुपारी आदि का उपयोग भी बंद कर देना चाहिए। तंबाकू युक्त मंजन भी न करें। कैंसर से बचने के लिए शराब का सेवन भी छोड़ना उचित होगा। इसके अतिरिक्त ज्यादा तले, भुने, मिर्च-मसाले युक्त आहार प्रतिदिन नहीं खाना चाहिए। अधिक चर्बीयुक्त खाद्य पदार्थों से भी परहेज करें। इसके अतिरिक्त मोटापे पर नियंत्रण भी कैंसर से बचाव के लिए लाभकारी है क्योंकि यह पाया गया है कि मोटे लोगों को कैंसर होने की संभावना अधिक होती है।

भोजन में विटामिन ‘सी’ और ‘बी’ से भरपूर पदार्थों जैसे- गाजर, आंवला, अमरूद, नींबू, हरी सब्जियां सलाद इत्यादि को पर्याप्त मात्रा में शामिल कर इस रोग से बचा जा सकता है। प्रयोगों द्वारा यह सिद्ध हो चुका है कि विटामिन ‘सी’ और ‘बी’ तथा भोजन में रेशों की मात्रा शरीर को कई तरह के कैंसर से बचाती है। रेशायुक्त खाद्य लेने से आंतों के कैंसर से सुरक्षा मिलती है।

उम्र के 40 वर्ष के पश्चात् या दो वर्षों के अंतराल में कैंसर के लिए शरीर की जांच करवाना भी कैंसर की रोक-थाम में सहायक होता है। केवल गले के कैंसर से ही नहीं, अपितु कई तरह के अन्य कैंसरों से भी इन उपायों द्वारा बचा जा सकता है।
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मोटापा कम करने के उपाय

वजन बढ़ने के साथ ही कई प्रकार की स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍यायें शुरू हो जाती हैं। मोटापा कम करने के लिए सबसे ज्‍यादा जरूरी है अपनी जीवनशैली में खास बदलाव की। स्वस्थ खानपान और नियमित व्यायाम के जरिए आप बढ़ते वजन पर काबू पा सकते हैं।  

मोटापा बढने से डायबी‍टीज, ब्लडप्रेशर, हार्ट अटैक, ब्रेन स्टोन, कैंसर, अनिद्रा, जोडों और घुटनों की बीमारियां शुरू हो जाती हैं। मोटापा कम करने के लिए हमे अपने डाइट प्लान को ध्यान में रखना चाहिए। टाइम पर खाना चाहिए, डाइट संतुलित मात्रा में लेनी चाहिए। डाइट में प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइडेट की प्रचुर मात्रा होनी चाहिए।

हर इंसान को प्रतिदिन 2500 प्रति कैलोरी डाइट हर रोज लेनी चाहिए। तभी हमारा शरीर स्वस्‍थ्‍य और छरहरा रहेगा। जंक और फास्ट फूड खाने से बचें। खाने में हरी और पत्तेदार सब्जियों का ज्यादा प्रयोग करें। खाने में सलाद का प्रयोग ज्यादा मात्रा में करना शुरू कर दें। ज्यादा से ज्यादा पानी पियें।


Motapa Ka ilaj in hindi

मोटापा कम करने के उपाय

  • हर रोज सुबह-सुबह एक गिलास ठंडे पानी में दो चम्मच शहद घोलकर मिला लीजिए। इस घोल को पीने से शरीर से वसा की मात्रा कम होती है।
  • खाने में गेहूं के आटे की चपाती बंद करके जौ और चने के आटे की चपाती लेना शुरू करें। जौ और चने में कार्बोहाइड्रेट पदार्थ होते हैं जो आसानी से पच जाते हैं।
  • नीबूं का रस गुनगुने पानी में निचोड़कर पीयें, इससे भोजन अच्छे से पचता है और शरीर भी हल्का लगता है। शर्दियों में नींबू वाली चाय पिएं तो इससे पेट में गैस नहीं बनती।
  • मौसमी हरी सब्जियों का प्रयोग ज्‍यादा मात्रा में करें। मौसमी सब्जियां जैसे - मेथी, पालक, बथुआ, चौलाईसाग हैं। इनमें कैल्शियम अधिक मात्रा में होता है।
  • कम उर्जा वाले वयंजनों का सेवन करें। जैसे भूने चने, मूंग दाल, दलिया आदि का सेवन  करें। इनमें फैट कम होता है।
  • सुबह नाश्ते में अंकुरित अनाज लीजिए। मूंग, चना और सोयाबीन को अंकुरित करके खाने से से उनमें मौजूद पोषक तत्‍वों की मात्रा दोगुनी हो जाती है।
  • यदि आप मांसाहारी हैं तो तला हुआ मांस खाएं जिसमें तेल और घी जैसे चिकनाईयुक्‍त पदार्थ कम मात्रा में हो। रेड मीट बिलकुल न खायें।
  • अधिक चिकनाईयुक्त दूध, बटर तथा इससे बने पनीर का सेवन बंद कर दें। क्‍योंकि इनमें वसा ज्‍यादा मात्रा में होता है जो कि मोटापे का कारण बन सकता है।
  • फास्ट फूड, जंक फूड, कचौरी, समोसे, पिज्जा बर्गर न खाएं। कोल्ड ड्रिंक न पिएं, क्योंकि कोल्डा ड्रिंक की 500 मिलीलीटर मात्रा में 20 चम्मच शुगर होती है जिससे मोटापा बढ़ता है।
  • सोयाबीन का सेवन कीजिए। इसमें ज्‍यादा मात्रा में प्रोटीन होता है और इसमें पाया जाने वाला आइसोफ्लेवंस नामक प्रोटीन शरीर से चर्बी को कम करता है।
  • दही का सेवन करने से शरीर की फालतू चर्बी घटती है। मटठे का भी सेवन दिन में दो-तीन बार करें।
  • दो बडे चम्मच मूली के रस शहद में मिलाकर बराबर मात्रा में पानी के साथ पिएं, ऐसा करने से माह के बाद मोटापा कम होने लगेगा।
  • व्‍यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल कीजिए। व्‍यायाम जैसे - साइकलिंग, जॉगिंग, सीढी़ चढ़ना-उतरना, रस्सी कूदना, टहलना, घूमना इस प्रकार के व्यायाम नियमित रूप से करने से वजन घटाया जा सकता है।
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नाभिचक्र का अपने स्थान से हटना


परिचय-
 
मनुष्य के शरीर के विकास, नियंत्रण तथा संचालन में नाभि महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। माता के पेट में गर्भाधारण के समय से लेकर मृत्यु तक नाभि केन्द्र सतर्क, सक्रिय तथा सजग रहता है। माता के गर्भ के समय में नवजात शिशु का नाभि केन्द्र ही विकसित होता है। नवजात शिशु में नाभि केन्द्र ही प्राणों का संचय करता है। इसी के कारण ही उसके शरीर का विकास होता है।

नाभिचक्र का अपने स्थान से हटना nabhi ka digna


यदि नाभि शरीर में ठीक जगह न हो तो या फिर वह अपने स्थान से हट जाए, तो उसे `धरण पड़ गई` कहते हैं। इसके कारण शरीर में और भी कई रोग हो जाते हैं जैसे- यदि नाभि ऊपर की ओर चली गई तो गैस, खट्टी डकारें ,कब्ज तथा कई प्रकार के रोग हो सकते हैं। यदि नाभि नीचे की ओर चली गई हो या फिर नीचे की ओर खिसक गई तो रोगी को दस्त लगना, जी-मिचलाना जैसे रोग हो जाते हैं।

नाभिचक्र का अपने स्थान से हटने के कारण-

व्यक्ति के चलने-फिरने में असावधानी, अत्यधिक कूदने-फांदने, अधिक वजन उठाने वाले कार्य करने या किसी प्रकार से ऊंची-नीची जमीन पर अचानक पैर पड़ जाने से झटका लगता है तो यह रोग उस व्यक्ति को हो जाता है। अधिक बोझ उठाने तथा गलत तरीके के खान-पान के कारण भी यह रोग हो सकता है।

नाभिचक्र आपने स्थान पर है या नहीं यह पता लगाने के लिए कुछ दिशा निर्देश-
  • नाभिचक्र अपने स्थान पर है या नहीं यह पता लगाने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को सुबह के समय में शौच क्रिया के बाद पीठ के बल सीधा लेट जाना चाहिए।
  • रोगी व्यक्ति को अपने हाथ बगल में शरीर के साथ सीधे रखने चाहिए तथा दूसरे व्यक्ति को कहना चाहिए कि एक धागा लेकर नाभि से छाती की एक तरफ की निप्पल तक नापे।
  • इसके बाद रोगी को यह क्रिया दूसरे निप्पल के साथ भी करनी चाहिए और पता करना चाहिए कि दोनों तरफ के निप्पल के साथ धागे की समान दूरी है या नहीं।
  • यदि निप्पल के दोनों ओर की दूरी समान नहीं है तो समझा लेना चाहिए कि नाभिचक्र अपने स्थान से हट गई है और यदि दूरी समान है तो समझना चाहिए कि नाभिचक्र अपने स्थान पर है।
  • नाभिचक्र का अपने स्थान से हट जाने का पता लगाने का एक तरीका यह भी है कि सुबह के समय में खाली पेट पीठ के बल अपने दोनों टांगों को सीधा करके लेट जाए।
  • यदि नाभिचक्र अपने स्थान से हटा हुआ होगा तो किसी एक पैर का अंगूठा दूसरे पैर के अंगूठे से कुछ ऊंचा उठा हुआ रहेगा अन्यथा नहीं।
नाभिचक्र का अपने स्थान पर हट जाने पर प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार-
  • अपने पैरों को नापने पर अंगूठा यदि ऊपर की ओर दिखे तो उसे ऊपर की ओर खींचें। इस प्रकार की क्रिया 5-6 बार करें। ऐसा करने से नाभिचक्र अपने स्थान पर आ जाता है।
  • नाभिचक्र को अपने स्थान पर करने के लिए सुबह के समय में रोगी व्यक्ति को बिना खाना खाए जमीन पर या तख्त पर सीधे लेट जाना चाहिए। इसके बाद अपनी टांगों को सामने की ओर फैला दें। फिर दायीं टांग के घुटने को ऊपर की ओर रखकर दाएं हाथ से दाएं घुटने पर थोड़ा सा दबाव देकर भूमि या तख्त पर लगाने की कोशिश करना चाहिए। लेकिन दबाव देते समय एक बात का ध्यान रखना चाहिए कि दबाव उतना ही दे जितना रोगी व्यक्ति सहन कर पाए। ठीक इसी प्रकार की क्रिया दूसरी टांग पर भी करनी चाहिए। इसके बाद 5 से 6 बार इस क्रिया को दोहराना भी चाहिए।
  • नाभिचक्र अपने स्थान से हट जाने पर नाभि के अन्दर 2-3 बूंद तेल डालें। इसके बाद नाभि के चारों ओर तेल लगाकर दाईं से बाईं तरफ कम से कम तीन बार मालिश करें। इसके बाद नाभि के चारों ओर कम से कम तीन बार बाईं से दाईं तरफ मालिश करें। इस प्रकार से उपचार करने से नाभिचक्र अपने स्थान पर आ जाता है।
  • नाभिचक्र अपने स्थान से हट जाने पर रोगी के दोनों पैरों के अंगूठों में धागा बांध दें।
  • नाभिचक्र के अपने स्थान पर हटने पर नाभिचक्र को ठीक करने के लिए अर्थात नाभि को अपने स्थान पर लाने के लिए कई प्रकार के आसन है जिनको करने पर नाभिचक्र अपने स्थान पर आ जाता है।
  • आसन कुछ इस प्रकार के हैं- धनुरासन, नौकासन, भुजंगासन, चक्रासन, शवासन तथा उत्तानपादासन
नाभिचक्र के अपने स्थान पर आ जाने के बाद निम्नलिखित सावधानी बरतनी चाहिए ताकि नाभिचक्र फिर से अपने स्थान से न हट जाए-
सावधानियां-
  • जब नाभिचक्र अपने स्थान पर आ जाए इसके बाद रोगी व्यक्ति को जब भी उठना हो उसे बाईं करवट लेकर धीरे से उठना चाहिए।
  • रोगी को कुछ दिनों तक कागासन में बैठकर थोड़ा-सा अंकुरित या हल्का भोजन करना चाहिए।
  • रोगी को पानी अधिक से अधिक पीना चाहिए।
  • रोगी व्यक्ति को अधिक से अधिक आराम करना चाहिए।
  • नाभिचक्र से पीड़ित रोगी को कभी भी भारी वजन नहीं उठाना चाहिए। इस प्रकार से रोगी व्यक्ति का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार करने से रोगी का नाभिचक्र अपने स्थान पर आ जाता है तथा नाभिचक्र के हटने के कारण जो रोग व्यक्ति को होते हैं वे भी ठीक हो जाते हैं।
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Jodo ke Dard ka Ilaj - गठिया का आयुर्वेदिक इलाज़

Gathiya Baav Ka Desi Illaj | गठिया का आयुर्वेदिक इलाज़ | Jodo Ke Dard Ka Chamatkari Illaj:

  मित्रो गठिया रोग का भयानक दर्द जो सर्दी में और ज्यादा हो जाता है इसका एक रामबाण इलाज़ है मेथी,सोंठ और हल्दी तीनो को बराबर मात्रा  में पीस कर चूर्ण बना ले और इसे सुबह खाली  पेट गरम पानी के साथ लेना है । इससे गठिया के दर्द में आराम मिलता है । इस चूर्ण को लगभग डेढ़ या दो महीना लेना चाहिए जिससे पूरा आराम मिले । 



एक पेड़ जिसे हारसिंगार का पेड़ कहते है  इसके फूलो में बहुत महक होती है मतलब अच्छी खुशबू होती है उसके फूलों की जो रात में गिरे हो सवेरे उठा कर  उन्हें धो कर चटनी बना ले और एक गिलास पानी में उसे उबाले जब तक वह आधा न रह जाये फिर इसे ठंडा करके इसे पीने से हर तरह का गठिया का दर्द दूर हो जाता है
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महिलाओं के लिए यह है सेक्स का मतलब

पुरुषों की तरह ही महिलाओं के पास भी सेक्स करने के कई कारण होते हैं। लेकिन, महिलाओं के लिए बेहतर सेक्स संबंधों की परिभाषा पुरुषों की अपेक्षा कुछ अलग होती है। मनोवैज्ञानिक सिंडी मेस्टन और डेविड बुस ने अपनी पुस्तक why women have sex में इसका विस्तार से जिक्र किया गया है। मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक महिलाएं सिर्फ प्यार में ही सेक्स नहीं करतीं, बल्कि इसके पीछे 237 अलग-अलग वजहें होती हैं। अगर आप यह मानते हैं कि महिलाएं सेक्स के मामले में ज्यादा खुलापन नहीं रखतीं तो आप गलत हो सकते हैं।



करीब एक हजार महिलाओं पर किए गए शोध के मुताबिक महिलाएं सेक्स सिर्फ प्यार के लिए नहीं, बल्कि पुरुष का बेहतर साथ पाने के लिए, आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए, घर में अपना हक जमाने के लिए और सिर दर्द जैसी समस्या से निदान के लिए भी सेक्स करना पसंद करती हैं।


यही नहीं मनोवैज्ञानिकों ने अपनी किताब में कहा है कि महिलाएं कई बार अच्छे खासे फिट और चार्मिंग पुरुषों को छोड़कर सिर से गंजे और तोंद वाले लोगों को भी अपना हमसफर चुन लेती हैं। इसकी वजह उनकी कमाई, घर को सहारा देने की क्षमता और विश्वास होता है। शोध के मुताबिक महिलाएं अपने साथी का चुनाव डार्विन की थ्योरी 'सर्वाइवल इज दि फिटेस्ट' के आधार पर करती हैं। यह चौंकाने वाला हो सकता है, लेकिन अध्ययन के मुताबिक महिलाओं के पैमाने भी अलग-अलग होते हैं, जो काफी लाभदायक भी है।

मनोवैज्ञानिकों ने महिलाओं की विविधतापूर्ण सोच का हवाला देते हुए लिखा है कि यदि सभी महिलाएं लंबे कद के पुरुषों को ही पसंद करने लगेंगी तो फिर छोटे कद वाले लोगों के लिए तो जगह ही नहीं बचेगी। महिलाओं के लिए प्यार की बात की जाए तो वह सुरक्षा के साथ ही बच्चों को प्यार देने वाले और आत्मविश्वासी लोगों को पसंद करती हैं। महिलाएं प्यार का इस्तेमाल प्यार जताने, प्यार पाने औप उसे बनाए रखने के लिए भी करती हैं।  
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​पैसा न तोड़ दे रिश्तों की डोर

हर मीडिल क्लास फैमिली में एक वक्त आता है जब वित्तीय मामलों पर पति-पत्नी के बीच मतभेद होते हैं। इसकी वजह कम बचत और खर्चों का अनलिमिटेड होना है। फाइनेंस को लेकर दिक्कतें न आएं, इसके लिए जरूरी है कि हर कपल मनी मैनेजमेंट का सहारा ले। हम आपको बता रहे हैं शादी में मनी मैनेजमेंट के टिप्स:

सब कुछ क्लीयर रखें
एक महिला अपनी फैमिली के विस्तार के लिए जॉब से ब्रेक ले सकती है या फिर एक पुरूष अपने फाइनेंशियली डिपेंडेंट पैरेंट्स की मदद कर सकता है। मगर जो भी भविष्य में आपकी जिम्मेदारियां हैं, उन्हें अपने पार्टनर से जरूर शेयर करें। रिलेशनशिप काऊंसलर, सीमा हिंगोरन कहती हैं, 'अपने प्लान्स को पार्टनर से डिस्कस करना जरूरी है। इससे न सिर्फ उन्हें आपकी इच्छा पता होती है, साथ ही वह इसके लिए मानसिक तौर पर तैयार रहते हैं और खुद भी आपकी सहायता के लिए तैयार रहते हैं।'



इनकम एक्सपेंडिचर चार्ट करें तैयार


अब चूंकि आपको अपनी मासिक इनकम और खर्चे पता हैं, तो फिर इसके लिए बजट बनाकर इन्हें जॉइन्टली प्लान करें। इसमें आप अपने हाउस रेंट और अन्य खर्चे भी शामिल करें। इसके लिए आप अपनी इनकम लिखें और खर्चों की लिस्ट बनाएं ताकि आपके पार्टनर को आपके खर्चे, इनकम और सेविंग का अंदाजा रहे और उसी के अनुसार वह अपनी लाइफ प्लान करे।

बिल के लिए भी जॉइन्ट सेविंग अकाऊंट
यूं तो कपल्स में जॉइन्ट अकाउंट का चयन काफी पुराना है, मगर सेविंग के लिए ही नहीं, बल्कि अपने खर्चों के लिए भी जॉइन्ट अकाउंट बनाएं। ध्यान रखें कि इसमें खर्चों के पैसे शामिल हों। अपनी सैलरी के अनुसार ही इस अकाउंट में एक फिक्स्ड अमाउंट डालें। इस तरह आप दोनों में से जिसकी इनकम कम है, उस पर खर्चों का ज्यादा भार भी नहीं पड़ेगा।

इमरजेंसी फंड की व्यवस्था इमरजेंसी कभी भी किसी भी समय आ सकती है। ऐसी स्थिति में इमरजेंसी के लिए सेविंग करना बहुत जरूरी है। मगर यह सेविंग यूं ही न करें, बल्कि इसके लिए अलग से फंड बनाएं जिसमें हर माह कुछ निश्चित राशि जमा करें। बिना इमरजेंसी के इसमें से पैस न निकालें।

ट्रांसपैरेंसी का रखें ध्यान

इन खर्चों को लेकर आप दोनों के मन में किसी तरह की कोई गलतफहमी न पैदा हो, इसके लिए ट्रांसपैरेंसी भी बहुत जरूरी है। अगर आप घर खर्च से अलग भी कहीं खर्च करते हैं, तो बेहतर है कि इसके बारे में अपने पार्टनर को जरूर सूचित कर दें। अपने पैसों में से भी अगर आपने कोई पर्सनल खर्च भी किया है, तो वह भी खुलकर बताएं। अपने खर्चों को लेकर सीक्रेट रखना पार्टनर के माइंड में गलतफहमी पैदा कर सकता है।

समझौते और डिस्कशन करें

वित्तीय मामलों को समझदार और मैच्योर बनकर डिस्कस करें। ध्यान रखें कि दोनों पार्टनर को कुछ समझौते करने पड़ सकते हैं।

घर में बजट और खर्चों को लेकर अक्सर पति-पत्नी के बीच बह होती है। कई बार यह कारण पति-पत्नी के बीच शक और दूरियों का कारण भी बन जाता है।  
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